लोकतंत्र की खिल्ली उड़ाती सरकार
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कैसी विडम्बना है
की विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमन्त्री जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं
तो लोकतंत्र का ”लोक” उदासीन रवैया अपनाता है और कोई तवज्जो नहीं देता, और जब उसी लोकतंत्र का एक व्यक्ति उसी दिन राष्ट्र को संबोधित करता है तो सारा राष्ट्र टीवी के सामने बैठकर उसको सुनता है…………….!
प्रधानमन्त्रीजी को अपने ही देश में PM GO BACK के नारों के साथ स्वागत किया जाता है…………………!
आई आई टी खड़गपुर के छात्र दीक्षांत समारोह में प्रधानमन्त्री के हाथों डिग्री लेने से मना कर देते हैं……………!
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munish @ September 22, 2011
इतिहास के लिए जरूरी हैं आतंकवादी
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लीजिये साहब फिर से बम धमाके, ऐसा लगता है की आतंकवादी जब ट्रेनिंग लेकर तैयार हो जाते हैं तो
प्रक्टिस करने के लिए भारत आ जाते हैं चलो यहीं पर अभ्यास कर लें, और देशों में तो दिक्कत आएगी, ये सर्वसुलभ देश है जब चाहो अभ्यास किया और जब मन आया यहाँ आये घूमे फिरे लूट पाट की चले गए. आतंकवादियों को पता है की इस देश की सरकार ” अतिथि देवो भव” की तर्ज पर आतंकवादियों की बड़ी इज्ज़त करती है और बड़े संभालकर रखती है. जितने चाहो नागरिकों को बम से उडाओ, एक सौ इकतीस करोड़ हैं कोई कमी नहीं आएगी ये आतंकवादी ही थक गए तो बात अलग है. सरकार भी हर बार कहती है की आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा, पब्लिक भी सोचती है की भाई ऐसा कौन सा जवाब जिससे मुहं टूट जाताहै…… इसका सीधा सा अर्थ है उनको तब जवाब देंगे जब हमारा मुहं टूट जाएगा, तो साहब जब तक सबके मुहं न टूट जाएँ तब तक तो आतंकवादियों को सरकार कुछ नहीं कहेगी.
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munish @ September 21, 2011
मेरी एतिहासिक होली
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मुझे होली बहुत अच्छी लगती है और शायद मैं उन लोगों में से हूँ जो सारा दिन होली के हुडदंग में शामिल होते हैं, सारे शहर में घुमते हैं, सबसे मिलते हैं. पिछली होली पर मैं बहुत उत्साहित था वैसे तो मैं हर होली पर ही उत्साहित रहता हूँ पर पिछली बार होली से एक दिन पूर्व मुझे एक मशीन मिली वो भी ऐसी वैसी मशीन नहीं थी, पूरी जादूई मशीन थी, उसका प्रयोग करके हम अपने भूत भविष्य में आ जा सकते थे
तो मैंने सोचा क्यों न भूत काल में ही घूम आऊं और होली खेल लूँ पता नहीं किस के साथ खेलने का मौका मिल जाए. मैंने मशीन का प्रयोग किया और उसका बटन दबा दिया …………
munish @ April 7, 2011
हे भगवान्, तुम ऐसे पिता किसी को भी मत देना………. !
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आप लोग हो सकता है मेरे इस कथन पर आश्चर्य व्यक्त करें या मुझे बड़ा ही नालायक और कपूत समझें परन्तु मैं ये बात बिलकुल मन से कह रहा हूँ की भगवान् मेरे जैसे पिता किसी को न दे. अरे ऐसे पिता का क्या फायदा जिससे जीवन के हर पग पर कष्ट ही मिला हो और कभी भी पिता होने की अनुभूति न हुई हो. मैं बचपन से आजतक अपने पिता को झेलता आया हूँ और वास्तव मैं देखा जाए तो मैं ही नहीं उन से जुड़ा हर व्यक्ति उन्हें झेल ही रहा है. कोई एक विषय या एक घटना हो तो आदमी भूल भी जाए परन्तु जब रोज ही नयी नयी बातें होती हों तो आदमी कैसे भूल सकता है. मुझे नहीं पता मेरे दादाजी ने उन्हें कैसे झेला था क्योंकि मेरे होश सँभालने से पहले ही स्वर्गारोहण के लिए निकल गए थे.
munish @ April 6, 2011
SONIA GANDHI : some untouched facts
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Do you know about the most reputed family of India?
Yes I am talking about the Gandhi family.
When I was reading a blog and some other sites than I found that something is wrong? What is truth I can’t say? Where was Mr.Suderashan wrong (Ex R.S.S. Chief) it is considerable.
Yes, Gandhi family can be a holy family for the congress. Mrs Sonia Gandhi can ba India for congress but not for whole country. Here I am giving some links in English and Hindi for the reader’s consideration, think positively.
These facts are giving by Dr. Subramaniya Swami who was the cabinet minister in 1990-91.
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munish @ November 19, 2010

