Archive for the ‘Society’ Category

लोकतंत्र की खिल्ली उड़ाती सरकार

Thursday, September 22nd, 2011

कैसी विडम्बना है

की विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमन्त्री जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं
तो लोकतंत्र का ”लोक” उदासीन रवैया अपनाता है और कोई तवज्जो नहीं देता, और जब उसी लोकतंत्र का एक व्यक्ति उसी दिन राष्ट्र को संबोधित करता है तो सारा राष्ट्र टीवी के सामने बैठकर उसको सुनता है…………….!
प्रधानमन्त्रीजी को अपने ही देश में PM GO BACK के नारों के साथ स्वागत किया जाता है…………………!
आई आई टी खड़गपुर के छात्र दीक्षांत समारोह में प्रधानमन्त्री के हाथों डिग्री लेने से मना कर देते हैं……………!

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इतिहास के लिए जरूरी हैं आतंकवादी

Wednesday, September 21st, 2011

लीजिये साहब फिर से बम धमाके, ऐसा लगता है की आतंकवादी जब ट्रेनिंग लेकर तैयार हो जाते हैं तो
प्रक्टिस करने के लिए भारत आ जाते हैं चलो यहीं पर अभ्यास कर लें, और देशों में तो दिक्कत आएगी, ये सर्वसुलभ देश है जब चाहो अभ्यास किया और जब मन आया यहाँ आये घूमे फिरे लूट पाट की चले गए. आतंकवादियों को पता है की इस देश की सरकार ” अतिथि देवो भव” की तर्ज पर आतंकवादियों की बड़ी इज्ज़त करती है और बड़े संभालकर रखती है. जितने चाहो नागरिकों को बम से उडाओ, एक सौ इकतीस करोड़ हैं कोई कमी नहीं आएगी ये आतंकवादी ही थक गए तो बात अलग है. सरकार भी हर बार कहती है की आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा, पब्लिक भी सोचती है की भाई ऐसा कौन सा जवाब जिससे मुहं टूट जाताहै…… इसका सीधा सा अर्थ है उनको तब जवाब देंगे जब हमारा मुहं टूट जाएगा, तो साहब जब तक सबके मुहं न टूट जाएँ तब तक तो आतंकवादियों को सरकार कुछ नहीं कहेगी.

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हे भगवान्, तुम ऐसे पिता किसी को भी मत देना………. !

Wednesday, April 6th, 2011

आप लोग हो सकता है मेरे इस कथन पर आश्चर्य व्यक्त करें या मुझे बड़ा ही नालायक और कपूत समझें परन्तु मैं ये बात बिलकुल मन से कह रहा हूँ की भगवान् मेरे जैसे पिता किसी को न दे. अरे ऐसे पिता का क्या फायदा जिससे जीवन के हर पग पर कष्ट ही मिला हो और कभी भी पिता होने की अनुभूति न हुई हो. मैं बचपन से आजतक अपने पिता को झेलता आया हूँ और वास्तव मैं देखा जाए तो मैं ही नहीं उन से जुड़ा हर व्यक्ति उन्हें झेल ही रहा है. कोई एक विषय या एक घटना हो तो आदमी भूल भी जाए परन्तु जब रोज ही नयी नयी बातें होती हों तो आदमी कैसे भूल सकता है. मुझे नहीं पता मेरे दादाजी ने उन्हें कैसे झेला था क्योंकि मेरे होश सँभालने से पहले ही स्वर्गारोहण के लिए निकल गए थे.

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Europeans on Ayodhya, Temple or Mosque…….!

Saturday, September 18th, 2010

In Ayodhya there was a temple or a mosque, on this issue the court’s decision to come. Hindus say it is the birthplace of Lord Ram and his temple was located here. And according to Muslims there was a mosque and not a temple.

This was broken by some volenteer workers in 1992. These are our views and can be affected our religious feelings. But what are europeon travelers and other scholars think about this matter. This is also very important.

So we now present a brief summary of Ayodhya recorded by European travellers, archaeologists and scholars.

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Ant and the Grasshopper, India is still a developing country………..!

Sunday, September 5th, 2010

Old Story:

The Ant works hard in the withering heat all summer building its house and
laying up supplies for the winter. The Grasshopper thinks the Ant is a fool
and laughs dances plays the summer away. Come winter, the Ant is warm and
well fed. The Grasshopper has no food or shelter so he dies out in the
cold.

New Indian Version:

The Ant works hard in the withering heat all summer building its house and
laying up supplies for the winter. The Grasshopper thinks the Ant’s a fool
and laughs dances plays the summer away.

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